बढ़ती बेरोजगारी से देश के युवा परेशान

छात्र और तमाम बेरोजगार युवक सड़क पर है. नारेबाजी और आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है. हर नेता अपने आपको देश के युवाओं का रहनुमा साबित करने में लगा हुआ है.

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बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन

लखनऊ:बेरोजगारी बड़ी बीमारी. फिलहाल पूरे देश में आर्थिक मंदी है. जीडीपी का रो-रो कर बुरा हाल है. थाली में महंगाई की मार है. व्यापार की रफ़्तार धीमी हो चली है, मतलब ये कि सबकुछ अस्त-व्यस्त है. रोजगार के मुद्दे पर सरकार की ट्रेन पटरी से उतरती नज़र आ रही है. छात्र और तमाम बेरोजगार युवक सड़क पर है. नारेबाजी और आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है. हर नेता अपने आपको देश के युवाओं का रहनुमा साबित करने में लगा हुआ है. ताली और थाली दोनों की आवाज़ दब सी गयी है. तमाम छात्र और नेताओं की माने तो ठीक-ठाक दिन के लाले पड़ गए है अब अच्छे दिन की उम्मीद क्या ही की जाए. कोरोना अलग से पीछे पड़ा है. कुछ की माने तो साल बुरा है, वहीं कुछ ऐसे भी जिनका सीधा-सीधा मानना है कि सरकार जानबूझकर कुछ नहीं करना चाहती.

छात्रों का कहना है कि सरकार जब सत्ता में आई तो हर साल २ करोड़ नौकरियां देने का वादा किया गया, लेकिन कुछ मिला नहीं. जो मिली वो चीज़ है आश्वाशन. घर वाले कहते है काबिलियत नहीं है तुममे, अब उनसे क्या कहे काबिलियत दिखाने के लिए अवसर का होना जरूरी है. जब अवसर ही नहीं होगा तो काबिलियत लेकर कौन सा झंडा गाड़ देंगे.

कोरोना के चलते परेशानियों का अम्बार सा लग गया है. देश के विकास की रफ़्तार फिलहाल रुक सी गयी है. बेरोजगारी चरम पर है. ऐसे में सरकार को जल्द ही कुछ ठोश कदम उठाने होंगे जिससे विकास को फिर से रफ़्तार मिल सके और बेरोजगार युवाओं को उनके सपनो की नौकरी.

राज्य सरकारों को फिलहाल बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र के साथ गहन मंथन करने की जरूरत है. जल्द से जल्द आम आदमी के थाली का ध्यान नहीं दिया गया तो इसका परिणाम अलग-अलग सरकारों के लिए काफी हानिकारक और नुकसानदायक हो सकता है.

 

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